केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में बुधवार को एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। केंद्र सरकार ने एक ही दिन में बोर्ड के शीर्ष पदों पर बैठे चेयरमैन और सचिव दोनों को पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बोर्ड की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर देश भर में भारी विवाद छिड़ा हुआ है। सरकार ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं।
शीर्ष स्तर पर हुए ये बड़े बदलाव
कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा जारी आदेश के अनुसार, बोर्ड में निम्नलिखित महत्वपूर्ण नियुक्तियां की गई हैं:
- नए चेयरमैन: 2001 बैच के AGMUT कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोकहांडे प्रशांत सीताराम को CBSE का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह राहुल सिंह का स्थान लेंगे, जिन्हें अब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर भेजा गया है।
- नए सचिव: भारतीय सूचना सेवा के 2008 बैच के अधिकारी वरुण भारद्वाज को CBSE का नया सचिव बनाया गया है। वह हिमांशु गुप्ता की जगह कार्यभार संभालेंगे।
निवर्तमान सचिव हिमांशु गुप्ता को प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए समय से पहले उनके मूल कैडर (गृह मंत्रालय) वापस भेज दिया गया है। साथ ही उन्हें दिसंबर 2030 तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है, जिसे सरकार के बेहद सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है।
CBSE ने इस साल कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की शुरुआत की थी। इस व्यवस्था के तहत शिक्षकों को जांच के लिए असली कॉपियों के बजाय उनकी स्कैन की गई डिजिटल प्रतियां दी गई थीं।
छात्रों और अभिभावकों के गंभीर आरोप: नतीजे आने के बाद इस सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। छात्रों ने शिकायत की कि:
- कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन में भारी देरी हुई।
- सबसे गंभीर आरोप यह लगा कि छात्रों को जो स्कैन कॉपियां दिखाई गईं, उनमें से कुछ की हैंडराइटिंग छात्रों की मूल लिखावट से मेल नहीं खा रही थी। इससे कॉपियों के आपस में बदलने की आशंका गहरा गई।
CBSE ने खुद कम से कम दो मामलों में इस विसंगति को स्वीकार किया है और छात्रों के अंक संशोधित किए हैं।
एस राधा चौहान करेंगी मामले की जांच
विवाद के तूल पकड़ने के बाद केंद्र सरकार ने OSM प्रणाली की खरीद प्रक्रिया और इसके क्रियान्वयन की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की कमान एस राधा चौहान को सौंपी गई है, जिन्हें एक महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
सियासी घमासान: विपक्ष ने साधा निशाना
इस फेरबदल के बाद राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए कहा कि बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों को तो हटा दिया गया, लेकिन शिक्षा मंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इस बदलाव को जवाबदेही तय करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश करार दिया। हालांकि, सरकार ने इन तबादलों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।
छात्रों के लिए जरूरी सूचना: 6 जून तक पुनर्मूल्यांकन का मौका
इस पूरे विवाद के बीच, CBSE ने प्रभावित छात्रों को राहत देते हुए पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल खोला है।
- कौन कर सकता है आवेदन? केवल वे छात्र जिन्होंने अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त कर ली है।
- अंतिम तिथि: छात्र 6 जून की मध्यरात्रि तक इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
अब सभी की नजरें एस राधा चौहान समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह साफ करेगी कि इस डिजिटल गड़बड़ी के पीछे कोई तकनीकी खामी थी या फिर कोई बड़ा प्रशासनिक भ्रष्टाचार।
