जेपी एसोसिएट्स विवाद के बीच वेदांता पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, राजनीतिक और कॉरपोरेट जगत में हलचल

अडानी को चुनौती देने का नतीजा या फेमा का मामला? वेदांता पर ईडी के एक्शन से गरमाई देश की राजनीति।

Johar News Times
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दिग्गज कारोबारी समूह जेपी एसोसिएट्स की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण को लेकर चल रहे कड़े कानूनी विवाद के बीच वेदांता समूह पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने देश के राजनीतिक और कारोबारी हलकों में हलचल तेज कर दी है। ईडी द्वारा वेदांता समूह और उसके चेयरमैन अनिल अग्रवाल से जुड़े ठिकानों पर यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के कथित उल्लंघनों की जांच को लेकर की जा रही है।

जेपी परिसंपत्ति विवाद और वेदांता का दावा

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वेदांता समूह जेपी एसोसिएट्स की संपत्तियों के आवंटन को लेकर अदालती लड़ाई लड़ रहा है। वेदांता समूह का दावा है कि उसने जेपी एसोसिएट्स के लिए लगभग 16,726 करोड़ रुपये की सबसे ऊंची (Highest) बोली लगाई थी। इसके बावजूद, लेनदारों की समिति ने कुछ अलग मानदंडों का हवाला देते हुए दूसरे प्रस्ताव को प्राथमिकता दे दी। वेदांता ने इस फैसले को देश के सर्वोच्च न्यायिक मंचों पर चुनौती दी है।

टाइमिंग पर उठे सवाल: विपक्ष ने साधा निशाना

ईडी की इस कार्रवाई के बाद देश में सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस सहित विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई के ‘समय’ को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और इसे सीधे तौर पर जेपी परिसंपत्ति विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

  • कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सीधे तौर पर सवाल उठाते हुए कहा कि जेपी एसोसिएट्स अधिग्रहण मामले में जैसे ही वेदांता ने अडानी समूह को चुनौती दी, उसके तुरंत बाद ही उस पर ईडी का एक्शन हो गया। उन्होंने दावा किया कि पहले वेदांता को सर्वोच्च बोलीदाता माना गया था, लेकिन बाद में अचानक फैसला बदल दिया गया।
  • राजनीतिक टिप्पणीकार प्रशांत टंडन ने भी सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की टाइमिंग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वेदांता द्वारा जेपी परिसंपत्तियों के आवंटन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की खबर आने के ठीक बाद ईडी की कार्रवाई शुरू होना कई सवाल खड़े करता है।

उद्योग जगत की बढ़ी नजरें

हालांकि, इन तीखे राजनीतिक आरोपों पर ईडी या केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या टिप्पणी सामने नहीं आई है।

दूसरी ओर, कॉरपोरेट विश्लेषकों का मानना है कि बुनियादी ढांचा , ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों जैसे कोर सेक्टर्स में विस्तार को लेकर बड़े कॉरपोरेट घरानों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। यही वजह है कि जेपी एसोसिएट्स की संपत्तियों पर कब्जे की यह जंग उद्योग जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

फिलहाल, एक तरफ जहां वेदांता की कानूनी लड़ाई अदालत में जारी है, वहीं दूसरी तरफ ईडी की जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में कोर्ट के फैसलों और जांच एजेंसियों के कदम से ही इस पूरे विवाद की असली तस्वीर साफ हो पाएगी।

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