अयोध्या: राम मंदिर के दानपात्र से चढ़ावा और जेवरात चोरी होने के सनसनीखेज मामले में अब तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। चौतरफा बढ़ते विवाद और भारी राजनीतिक दबाव के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, आस्था के इस सबसे बड़े केंद्र में हुई वित्तीय गड़बड़ी और कथित चोरी के आरोपों के बाद दोनों शीर्ष पदाधिकारियों पर नैतिक जिम्मेदारी लेने का भारी दबाव था। चर्चा है कि ट्रस्ट से जुड़े एक अन्य पदाधिकारी गोपाल ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इस महा-इस्तीफे ने देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है।
खुफिया कैमरों ने पकड़ा था ‘नोट चुराने’ का लाइव खेल
इस महाघोटाले और चोरी की परतें बेहद चौंकाने वाली हैं। जानकारी के मुताबिक, मई के अंतिम सप्ताह में जब ट्रस्ट ने बैंक खातों और दान राशि का मिलान किया, तो कुछ दानपेटियों में रकम उम्मीद से काफी कम मिली।
संदेह होने पर नोट गिनने वाले कक्ष में सीक्रेट/गुप्त कैमरे लगाए गए। जब सीसीटीवी फुटेज की जांच हुई, तो सबके होश उड़ गए। फुटेज में कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियों से धड़ल्ले से नकदी निकालकर अपने कपड़ों में छिपाते हुए रंगे हाथों कैद हुए।
ऐसे होता था बैंक वाउचर का खेल और जेवरातों की हेराफेरी:
- आरोपी नोटों की गड्डियों में एक्स्ट्रा नोट दिखाकर पहले वाउचर तैयार करते थे और बैंक में जमा करने से ठीक पहले उसमें से असली नोट निकाल लेते थे, जिससे कागजी रिकॉर्ड मैच कर जाता था।
- श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा से चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों (बाली, झुमकी, नथ, कंगन और पायल) को भी गायब किया जा रहा था।
- पुलिस ने छापेमारी के दौरान एक आरोपी के घर से करीब 10 लाख रुपये नगद भी बरामद किए हैं।
सिफारिशी नियुक्तियों और सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
एसआईटी की जांच में सुरक्षा व्यवस्था की एक बेहद गंभीर चूक भी सामने आई है। नोट गिनने जैसे अति-संवेदनशील काम में लगे कई कर्मचारी किसी न किसी रसूखदार की सिफारिश और जान-पहचान के आधार पर रखे गए थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि ड्यूटी खत्म होने के बाद इन कर्मचारियों की कोई शारीरिक तलाशी तक नहीं ली जाती थी, जिससे इन्हें चोरी करने की खुली छूट मिली हुई थी।
सीएम योगी आदित्यनाथ का कड़ा रुख: ‘दोषी बचेंगे नहीं’
इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार किया है। सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा, “जनआस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी पापी को बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने बताया कि जैसे ही यह मामला संज्ञान में आया, तुरंत एसआईटी का गठन कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। अयोध्या करोड़ों लोगों की आस्था का प्राण है और वहां कोई भी गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
8 आरोपी पहले ही जा चुके हैं सलाखों के पीछे
आपको बता दें कि ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर रामजन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी 8 मुख्य नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और रिटायर्ड बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं, जिनसे एसआईटी की टीम कड़ाई से पूछताछ कर रही है।
