गुड़ या चीनी: कौन बढ़ाता है तेजी से ब्लड शुगर? जानिए इस ‘हेल्दी’ विकल्प के पीछे का पूरा सच

अक्सर मीठा खाने की बात आते ही हमारे दिमाग में सफेद चीनी की जगह गुड़ का ख्याल आता है।

Johar News Times
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अक्सर मीठा खाने की बात आते ही हमारे दिमाग में सफेद चीनी की जगह गुड़ का ख्याल आता है। खासकर डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के बीच यह बात एक स्थापित सच की तरह मानी जाती है कि चीनी जहर है, लेकिन गुड़ खाने से ब्लड शुगर पर कोई खास असर नहीं पड़ता। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? या फिर आप एक बड़े भ्रम का शिकार हो रहे हैं? हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस सवाल का जवाब जितना सीधा दिखता है, उतना है नहीं। आइए जानते हैं कि इस आम धारणा के पीछे का असली वैज्ञानिक सच क्या है।

चीनी और गुड़: एक ही सिक्के के दो पहलू?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि चीनी और गुड़ दोनों का जन्म एक ही स्रोत से होता है—गन्ना। अंतर सिर्फ इन्हें बनाने के तरीके में है:

  • सफेद चीनी: इसे भारी रिफाइनिंग और क्रिस्टलाइजेशन की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इस प्रोसेस में इसके सारे प्राकृतिक गुण खत्म हो जाते हैं।
  • गुड़: यह अपेक्षाकृत कम प्रोसेस्ड होता है। यही वजह है कि गुड़ में आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिंक, फॉस्फोरस और पोटैशियम जैसे जरूरी मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स बचे रहते हैं, जो चीनी में पूरी तरह गायब हो जाते हैं।

शुगर स्पाइक का असली सच: कौन है ज्यादा खतरनाक?

मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लोगों को लगता है कि पोषक तत्व होने के कारण गुड़ डायबिटीज में सुरक्षित है, लेकिन न्यूट्रिशन (पोषण) और ब्लड शुगर पर असर, दो बिल्कुल अलग बातें हैं।

दोनों के असर को इस तरह समझा जा सकता है:

1. सफेद चीनी

सफेद चीनी शरीर में जाते ही तेजी से एब्जॉर्ब (अवशोषित) होती है। यह ग्लूकोज के स्तर को अचानक से बढ़ा देती है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘तुरंत शुगर स्पाइक’ कहा जाता है।

2. गुड़

गुड़ में मौजूद सुक्रोज की संरचना थोड़ी जटिल (complex) होती है। इसे टूटने और पचने में शरीर को थोड़ा समय लगता है। इसलिए, गुड़ खाने के तुरंत बाद ब्लड शुगर अचानक नहीं भागता, लेकिन कुछ घंटों के भीतर यह भी शुगर के स्तर को काफी ऊपर ले जाता है। गुड़ शुगर स्पाइक नहीं करता—यह सोचना पूरी तरह गलत है। यह सिर्फ चीनी के मुकाबले थोड़ी देर से असर दिखाता है, लेकिन नुकसान दोनों का लगभग बराबर है।

कैलोरी में कोई अंतर नहीं, फिर अंतर कहाँ है?

अगर आप वजन घटाने या डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए चीनी की जगह भर-भर कर गुड़ खा रहे हैं, तो संभल जाइए। कैलोरी के मामले में गुड़ और चीनी लगभग एक जैसे हैं।

फर्क सिर्फ गुणवत्ता (Quality) का है:

  • चीनी को ‘खाली कैलोरी’ (Empty Calories) कहा जाता है क्योंकि इससे शरीर को कोई पोषण नहीं मिलता।
  • गुड़ में मौजूद मोलासेस (Molasses) के कारण आपको कैलोरी के साथ-साथ कुछ जरूरी मिनरल्स मिल जाते हैं।

फाइनल वर्डिक्ट: डायबिटीज मरीजों के लिए क्या है सलाह?

गुड़ चीनी का एक ‘हेल्दी विकल्प’ जरूर है, लेकिन यह ‘शुगर-फ्री’ या डायबिटीज के मरीजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। दोनों में शुगर की मात्रा लगभग बराबर होती है। इसलिए अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो गुड़ का सेवन भी उतनी ही सावधानी और सीमित मात्रा में करें जितना कि चीनी का।

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