देश में हर तीसरा वकील फर्जी? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

देश में हर तीसरा वकील फर्जी? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

Johar News Times
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वकीलों के लिए राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री बनाने की मांग पर केंद्र, बार काउंसिल और यूजीसी को नोटिस

देश में वकालत पेशे की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, देश में हर तीन में से एक वकील फर्जी हो सकता है, जिससे न्याय व्यवस्था में अवैध घुसपैठ की आशंका बढ़ गई है। इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

राष्ट्रीय डिजिटल पहचान का प्रस्ताव

मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें देशभर के वकीलों के लिए आधार की तर्ज पर राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री बनाने की मांग की गई है। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक पंजीकृत वकील को एक विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान संख्या दी जाएगी, जिससे फर्जी वकीलों की पहचान आसान हो सके और उन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इस प्रस्ताव को “नवोन्मेषी” बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक की मदद से इसे लागू किया जा सकता है। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की है।

पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री लागू होती है तो वकीलों की पहचान और पंजीकरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। साथ ही फर्जी प्रैक्टिशनर्स पर अंकुश लगेगा और न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत होगा।

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