चार साल बाद भी नहीं मिली जमीन, एनएचएआई ने फिलहाल टेंडर प्रक्रिया की समाप्त,
चाईबासा शहर को भारी वाहनों के जाम से राहत दिलाने के लिए भारतमाला परियोजना के तहत प्रस्तावित चाईबासा बाईपास का निर्माण फिलहाल अधर में लटक गया है। करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 18.74 किलोमीटर लंबी चार लेन सड़क के लिए चार साल पहले टेंडर जारी किया गया था, लेकिन जमीन अधिग्रहण पूरा नहीं होने के कारण काम शुरू नहीं हो सका। अब एनएचएआई ने टेंडर रद्द कर दिया है।
रैयतों की आपत्तियों से अटका भूमि अधिग्रहण
जिला भू-अर्जन विभाग ने कई दौर की बातचीत कर कुछ रैयतों को जमीन देने के लिए तैयार भी किया, लेकिन कई रैयत अब भी सहमत नहीं हैं। इसके चलते परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी और निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। गुरुवार को केंद्रीय एनएचएआई अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में पूरी स्थिति की जानकारी दी गई। इसके बाद निर्देश दिया गया कि जब तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस परियोजना के लिए नया टेंडर जारी नहीं किया जाएगा।
20 गांवों से होकर गुजरना था बाईपास
प्रस्तावित बाईपास एनएच-75ई के 136 किलोमीटर से 150.600 किलोमीटर हिस्से तक बनाया जाना था। यह सड़क तीन प्रखंडों के 20 गांवों से होकर गुजरती। बाईपास खूंटपानी के पुटिदा से शुरू होकर करलाजोड़ी, बाईहातु, बड़बिल, टोंटी, डिलियामर्चा, खपरसाई, कातीगुटु, टेकासाई, डोबरीसाई, तेलगीसाई, सिकुरसाई, डोंकाहातु, तुईबीर, गितिलिपी, गुंडीपुआ, सिंहपोखरिया और झींकपानी के रघुनाथपुर होते हुए कैलेंडे में इंजीनियरिंग कॉलेज के पास निकलने वाला था।
जाम और हादसों से मिलती राहत
वर्तमान में लौह अयस्क लदे भारी वाहन चाईबासा शहर से होकर सरायकेला, चक्रधरपुर, रांची, बोकारो और जमशेदपुर की ओर जाते हैं। नो-एंट्री अवधि के कारण विभिन्न मार्गों पर ट्रकों की लंबी कतारें लगती हैं, जिससे जाम की समस्या बनी रहती है। बाईपास बनने से भारी वाहनों का आवागमन शहर से बाहर हो जाता, जिससे जाम की समस्या कम होती और सड़क दुर्घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद थी।
जमीन मिलते ही फिर निकलेगा टेंडर
एनएचएआई के कार्यपालक अभियंता विकास चंद्र भारती ने बताया कि भारतमाला परियोजना के तहत इस बाईपास को मंजूरी मिली थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण पूरा नहीं होने के कारण टेंडर रद्द करना पड़ा। उन्होंने कहा कि भू-अर्जन विभाग द्वारा जमीन उपलब्ध कराते ही परियोजना के लिए दोबारा टेंडर जारी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
