महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के रीढ़ की हड्डी पर तगड़ा प्रहार किया है। पुलिस और सुरक्षा बलों ने एक संयुक्त कार्रवाई में नक्सलियों द्वारा घने जंगलों के बीच जमीन में छिपाकर रखी गई एक पूरी ‘अवैध हथियार फैक्ट्री’ को खोज निकाला और उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
“ऑपरेशन फाइनल स्ट्राइक” के तहत की गई इस बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक से नक्सलियों के मंसूबों पर पानी फिर गया है। पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार बनाने के उपकरण और घातक विस्फोटक सामग्री बरामद की है।
गढ़चिरौली पुलिस को यह बड़ी कामयाबी हाल ही में सरेंडर कर चुके माओवादियों से पूछताछ के दौरान मिली। नक्सलियों ने खुलासा किया था कि पोमकेन-बिनगुंडा इलाके के घने जंगलों में भारी मात्रा में हथियार और आधुनिक मशीनें जमीन के नीचे गाड़कर छिपाई गई हैं।
खबर की पुष्टि होते ही स्पेशल ऑपरेशन टीम , प्राणहिता की संयुक्त टीमों और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड को तुरंत खतरनाक सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया।
जमीन खोदकर निकाला गया जखीरा
बीते 22 मई 2026 को सुरक्षा बलों ने पूरे जंगली इलाके की घेराबंदी कर एक सघन तलाशी अभियान चलाया। मेटल डिटेक्टरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से जब जमीन की खुदाई की गई, तो नीचे से माओवादियों का पूरा कारखाना निकल आया।
- जनरेटर, इन्वर्टर, बड़ी बैटरियां और सोलर पैनल
- ग्राइंडिंग मशीन, ड्रिलिंग मशीन और जिगसॉ मशीन
- बीजीएल (BGL) पाइप और 12 बोर गन के पाइप
- प्रेशर पंप और 20 फीट लंबा फुटबॉल पाइप
- हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाली खराब लेथ मशीनें
मौके पर ही किया गया नष्ट गढ़चिरौली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जंगल से बरामद की गई इन सभी खतरनाक माओवादी सामग्रियों और उपकरणों की गंभीरता को देखते हुए, सुरक्षा बलों ने सुरक्षा कारणों से उन्हें मौके पर ही नष्ट कर दिया।
सुरक्षा बलों पर बड़े हमले की थी तैयारी
पुलिस के अनुसार, नक्सली इन हथियारों, मशीनों और विस्फोटक सामग्रियों का इस्तेमाल आगामी चुनावों, सरकारी विकास कार्यों को रोकने या अपने ‘नक्सली सप्ताह’ जैसे मौकों पर सुरक्षाबलों पर बड़ा घात लगाकर हमला करने के लिए करते थे।
गढ़चिरौली पुलिस प्रशासन का कहना है कि जिले में अब माओवाद अंतिम सांसें ले रहा है और यह लगभग खत्म हो चुका है। अब नक्सलियों के हौसले पूरी तरह पस्त हैं, और जंगलों में छिपाकर रखे गए उनके बचे-कुचे हथियारों और विस्फोटकों को खोजकर नष्ट करने का यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
